
हरिद्वार, 03 मार्च। आगामी 2027 कुंभ मेले को लेकर एक न्यूज पोर्टल में प्रकाशित खबर पर संत समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। पोर्टल में दावा किया गया था कि कुंभ की व्यवस्थाओं और आर्थिक पारदर्शिता को लेकर संत समाज में विवाद और असंतोष है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वरिष्ठ संत ने खबर का खुलकर खंडन किया और इसे तथ्यों से परे बताया। साथ ही सरकार से ऐसे न्यूज पोर्टल का संचालन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वरिष्ठ संत ने कहा कि एक ओर सरकार 2027 के कुंभ मेले की तैयारियों को भव्य और दिव्य बनाने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ न्यूज पोर्टल बिना ठोस प्रमाण के नकारात्मक खबरें प्रकाशित कर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और आस्था का प्रतीक है। ऐसे में निराधार आरोप लगाकर संत समाज की छवि धूमिल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी साधु संत द्वारा आर्थिक मांग या दबाव की कोई घटना हुई है तो उसका ठोस प्रमाण सार्वजनिक किया जाए। बिना दस्तावेज और तथ्य के आरोप लगाना पत्रकारिता की मर्यादा के विपरीत है। संत ने कहा कि सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग हरिद्वार कुंभ को लेकर भ्रम फैलाने में लगे हैं, जिससे आम श्रद्धालुओं में गलत संदेश जा रहा है। ऐसे लोगों को प्रमाण सहित बात रखनी चाहिए, अन्यथा संत समाज को बदनाम करने की कोशिश बंद करनी चाहिए।
वहीं सूत्रों का कहना है कि पूर्व में आयोजित कुंभ मेलों के दौरान सरकारों द्वारा विभिन्न अखाड़ों को जो आर्थिक सहायता दी गई, वह परंपरानुसार व्यवस्थाओं के संचालन के लिए होती रही है। यह सहायता किसी एक अखाड़े तक सीमित नहीं रही। यदि कोई यह दावा करता है कि किसी एक अखाड़े ने सहायता नहीं ली, तो उसका भी स्पष्ट प्रमाण सामने आना चाहिए। वहीं संत समाज का कहना है कि कुंभ जैसे वैश्विक आयोजन को विवादों में घसीटना उचित नहीं है। यदि किसी को पारदर्शिता को लेकर शंका है तो प्रमाण के साथ खबर प्रकाशित की जाए।
सनसनीखेज खबरें प्रकाशित कर धार्मिक परंपराओं पर सवाल खड़े किए जाएं। संतों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार की जांच या तथ्यात्मक चर्चा से पीछे नहीं हैं, लेकिन निराधार आरोपों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि सरकार को ऐसे न्यूज पोर्टल और मंचों को चिन्हित कर कार्रवाई करनी चाहिए, जो सरकार की तैयारियों के साथ ही कुंभ मेले जैसे धार्मिक आयोजन को बदनाम कर रहे है।