
देहरादून, 2 अप्रैल 2026
डी.ए.वी. महाविद्यालय, देहरादून द्वारा “विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस–2026” के अवसर पर “ऑटिज़्म और मानवता: हर जीवन का मूल्य है” विषय पर एक उच्चस्तरीय जागरूकता एवं अकादमिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के नैदानिक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक एवं सामाजिक आयामों पर बहुआयामी विशेषज्ञ विमर्श प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य व्याख्यान श्रीमती अनीता शर्मा थपलियाल, संस्थापक, शाइन एवीआई लर्निंग, अमेरिका ने दिया। उन्होंने “ऑटिज्म को पहचानना और रोजमर्रा की जिंदगी में व्यक्तियों का समर्थन करना” विषय पर व्याख्यान देते हुए ऑटिज़्म की प्रारंभिक पहचान, व्यवहारिक संकेतकों, संवेदी (Sensory) चुनौतियों तथा परिवार एवं समुदाय आधारित सहयोग तंत्र की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) एवं जीवन-कौशल विकास की रणनीतियों को भी रेखांकित किया।
अपने विशेषज्ञ व्याख्यान में कर्नल डॉ. सुदीप आजाद ने ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर की क्लिनिकल प्रोफाइलिंग, प्रारंभिक लक्षणों की पहचान (Early Red Flags), डायग्नोस्टिक प्रोटोकॉल तथा साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप (Evidence-based Interventions) पर वैज्ञानिक एवं संरचित प्रस्तुति दी।
दूसरे विशेषज्ञ व्याख्यान के अंतर्गत सुश्री शिवानी कपूर, सीनियर एजुकेटर, लतिका रॉय फाउंडेशन ने “जागरूकता से कार्यान्वयन तक” थीम के अंतर्गत ऑटिज़्म के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन, नीति-आधारित हस्तक्षेप, तथा समुदाय-आधारित पुनर्वास (CBR) की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
ऑटिज़्म प्रभावित सुश्री यशस्वी जोशी द्वारा की गयी सांस्कृतिक प्रस्तुति में अपने नृत्य कार्यक्रम को संवेदनात्मक आयाम प्रदान करते हुए “समावेशिता” के संदेश को सृजनात्मक रूप में अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कौशल कुमार के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि समावेशी परिसर (Inclusive Campus Ecosystem) का निर्माण वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है।
इसके उपरांत, आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. ओनिमा शर्मा ने “संस्थागत दृष्टिकोण से ऑटिज्म जागरूकता और समावेशिता” विषय पर संबोधन देते हुए महाविद्यालय द्वारा समावेशी नीतियों, जागरूकता कार्यक्रमों तथा संवेदनशील शैक्षिक वातावरण के विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने गुणवत्तापरक शिक्षा (Quality Education) के अंतर्गत विविधता, समानता और समावेश (Diversity, Equity and Inclusion, DEI) के सिद्धांतों को संस्थागत ढांचे में एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में उप-प्राचार्य प्रो. एस. पी. जोशी द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें सभी विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोनिशा सक्सेना द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डी.बी.एस. (पी.जी.) कॉलेज, देहरादून के प्राचार्य डॉ. अनिल पाल सहित अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस ऑटिज्म जागरूकता कार्यक्रम में डी.ए.वी. महाविद्यालय के विभिन्न संकायाध्यक्ष प्रो. जी. पी. डंग, प्रो. देवना जिंदल शर्मा, प्रो सविता रावत, डॉ. पारुल दीक्षित, डीन छात्र कल्याण डॉ. गोपाल छेत्री, मुख्य नियंता डॉ. सत्यव्रत त्यागी, सभी विभागाध्यक्ष, और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों सहित सभी शोधार्थी एवं मनोविज्ञान एवं बी.एड. विभागों के छात्रों व छात्राओं द्वारा सक्रिय प्रतिभाग किया गया। इसके साथ ही डी.बी.एस. महाविद्यालय, देहरादून के सभी विभागों के विभागाध्यक्षों तथा दयानंद वूमेन ट्रेनिंग कॉलेज, देहरादून की सभी शिक्षिकाओं द्वारा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया। कुल मिलाकर संपूर्ण कार्यक्रम में 250 से अधिक शिक्षक, स्टाफ, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम के समापन चरण में सभी पूछे गए ऑटिज्म संबंधित प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समुचित उत्तर तथा समाधान भी मंचसीन विशेषज्ञों एवं परामर्शदाताओं द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को दिया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन (आई.क्यू.ए.सी.) प्रकोष्ठ द्वारा किया गया। डीएवी महाविद्यालय, देहरादून के प्रबंध तंत्र ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने में समग्र रूप से प्रेरित किया, महत्वपूर्ण योगदान दिया और इसे सफल बनाने में सराहनीय मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम आयोजन में महाविद्यालय के वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों प्रो. अनुपमा सक्सेना, प्रो. रीना चंद्रा, प्रो. गीतांजलि तिवारी, प्रो. सुमन त्रिपाठी, प्रो. देवना शर्मा, प्रो. रचना दीक्षित, डॉ. विनीत विश्नोई, डॉ. एस. वी. त्यागी, डॉ. गोपाल छेत्री, डॉ. नैना श्रीवास्तव, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. पुनीत सक्सेना, डॉ. राखी उपाध्याय, डॉ. निशा वालिया, डॉ. रूपाली बहल और डॉ. उषा पाठक आदि ने सक्रिय योगदान किया, जिनके प्रयासों और सहभागिता के साथ जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ।
कार्यक्रम ने ऑटिज़्म के प्रति वैज्ञानिक समझ, प्रारंभिक हस्तक्षेप, एवं समावेशी सामाजिक ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हुए समाज में जागरूकता एवं संवेदनशीलता को सुदृढ़ करने का प्रभावी प्रयास किया। कार्यक्रम ने न केवल ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया, बल्कि समाज में मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ करने का एक सशक्त संदेश भी प्रदान किया।