
देहरादून। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट बुनकरों एवं हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया और प्रदेशवासियों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उन बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का अवसर है, जो अपनी कला और मेहनत से देश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कारीगर केवल उत्पाद नहीं बनाते, बल्कि उनमें प्रदेश की संस्कृति और लोकजीवन की आत्मा भी समाहित होती है।
उन्होंने कहा कि हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास से बने उत्पाद उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा के प्रतीक हैं। इन उत्पादों की मांग अब देश के साथ-साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिला रहे हैं। राज्य सरकार भी हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों एवं शिल्पकारों को चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण और एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है, जिससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के तहत आधुनिक प्रशिक्षण, डिजाइन, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तराखंड के उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना किसी शिल्पकार के स्वाभिमान और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी एवं महिला शिल्पकार उपस्थित रहे।