
हरिद्वार। श्री गंगा दशहरा एवं पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्री तुलसी मानस मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़। भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच कथा व्यास स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। कथा स्थल भगवान श्रीहरि के जयकारों और भजनों से भक्तिमय बना रहा।
ब्रह्मलीन अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी जी महाराज के शिष्य स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने कथा के दौरान अधिक मास अर्थात पुरुषोत्तम मास का महत्व बताते हुए कहा कि जब कालचक्र में सूर्य और चन्द्र की गति का अंतर बढ़ जाता है, तब उस संतुलन हेतु जो पावन मास प्रकट होता है, वही अधिक मास कहलाता है। यह मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होने के कारण पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि यह मास साधना, भक्ति और आत्मशुद्धि का दिव्य अवसर है। ऐसे पुण्यकाल में यदि श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण किया जाए तो उसका फल असंख्य गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में भागवत कथा सुनने से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, मन, बुद्धि और चित्त की शुद्धि होती है तथा परिवार में सुख, शांति और सौभाग्य की वृद्धि होती है। साथ ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और पितरों के निमित्त किए गए अनुष्ठानों का भी विशेष फल मिलता है।
स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण स्वयं भगवान का स्वरूप मानी गई है। जहां भागवत कथा होती है वहां भगवान श्रीहरि का दिव्य निवास होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कार और सनातन परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान आर पी सिंह ने कथा व्यास स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज का विधिवत पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा और पुरुषोत्तम मास में इस प्रकार का धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है।