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त्याग, तपस्या और विद्वता की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन महंत देवानंद वन : श्रीमहंत रविंद्रपुरी

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Jun 12, 2026

महंत देवानंद वन का योगदान सदैव रहेगा स्मरणीय, संतों की सुरक्षा के लिए बने सख्त कानून : श्रीमहंत डॉ रविंद्रपुरी

हरिद्वार, 12 जून। राजस्थान के निरंजनी अखाड़े के ब्रह्मलीन महंत देवानंद वन की स्मृति में मनसा देवी मंदिर परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संत समाज ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान संतों ने महंत देवानंद वन की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी पर राजस्थान पुलिस का आभार भी व्यक्त किया।

सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि निरंजनी अखाड़े के युवा संत ब्रह्मलीन महंत देवानंद वन की निर्मम हत्या से समस्त संत समाज शोकाकुल और आक्रोशित था। उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस ने कोटा के एसएसपी के नेतृत्व में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करते हुए हत्यारों को गिरफ्तार किया है, जिसके लिए पुलिस टीम बधाई और आशीर्वाद की पात्र है।

श्रीमहंत डॉ रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत देवानंद वन त्याग, तपस्या और विद्वता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने सनातन धर्म और समाज के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन से अखाड़े और संत समाज को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। उन्होंने मां गंगा से दिवंगत संत की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।

उन्होंने सरकार से संत-महात्माओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष और सख्त कानून बनाए जाने की भी मांग की।

निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी, भारत माता मंदिर के महंत महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी तथा महंत राज गिरी ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत देवानंद वन का सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलकर मानव कल्याण के कार्यों में योगदान देना चाहिए।

श्रद्धांजलि सभा में महामंडलेश्वर स्वामी वेदमूर्ति पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी आदियोगी पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी, मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल शर्मा, सीमा शर्मा, प्रबंधक महेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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