
हरिद्वार। परम् पूज्य संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज की परम शिष्या, परम पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता जी के सानिध्य में आयोजित 1008 भक्तामर महामण्डल बीजाक्षर विधान (विश्व शांति महायज्ञ) का अंतिम दिन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
विधान के अंतिम दिन प्रातःकाल में 1008 भगवान आदिनाथ जी के जन्म कल्याणक के अवसर पर विशेष अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ जी का जल, दूध एवं विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। इसके पश्चात नित्यनियम पूजा संपन्न कर भक्तों द्वारा पूर्ण अर्घ अर्पित किए गए और विश्व शांति की कामना के साथ हवन किया गया।
इस अवसर पर पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता जी ने अपने प्रवचन में कहा कि उत्तराखण्ड की पावन धरती 1008 भगवान आदिनाथ की तपस्थली एवं मोक्ष स्थली रही है। यहां का प्रत्येक कण अत्यंत पवित्र, पूजनीय और वंदनीय है। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों और साधना से न केवल आत्मिक शुद्धि होती है बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का भी विस्तार होता है।
विधान के समापन अवसर पर भगवान आदिनाथ जी की एक भव्य शोभायात्रा प्रेमनगर आश्रम से ललतारौ पुल तक निकाली गई। भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर प्रेमनगर आश्रम से शोभायात्रा का शुभारंभ किया गया। बैण्ड-बाजों, भव्य झांकियों और श्रद्धालुओं की जयकारों के साथ निकली यह शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई दिगम्बर जैन मंदिर, ललतारौ पुल हरिद्वार पर पहुंचकर सम्पन्न हुई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का स्वागत किया।
इस अवसर पर संदीप जैन एकम्स, जे.सी. जैन, मीडिया प्रभारी सतीश जैन, आदेश जैन, बालेश जैन, नितेश जैन, विजय जैन, अर्चना जैन, रीतू जैन, पूजा जैन, प्रियंका जैन, मोना जैन, पारूल जैन, रजत जैन, पीयूष जैन, समर्थ जैन, अंकित जैन, हन्नी जैन, रूचिन जैन, रवि जैन, मनोज जैन, ओमकार जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर श्रद्धालुओं ने हर्ष व्यक्त किया।